Teacher Jokes in Hindi, Padhai karo Padhai

टीचर – पढाई करो पढाई 🙍
लायक बच्चा – पढाई तो वो करते है जिन्हे बैंक में नौकरी करनी है
हम तो लोन लेंगे लोन.. 🤣🤣


टीचर (लड़के से) :- काहे बे.. कल स्कूल काहे नहीं आए??
लड़का :- काहे.. कल जौ आये रहें.. उनका कलेक्टर बना दिए हो का??


अध्यापक: किसी ऐसी जगह का नाम बतायो जहां पर
बहुत सारे लोग हों फिर भी तुम अकेला महसूस करो?
छात्र: परीक्षा कक्ष!
अध्यापक बेहोश!


टीचर :- 1869 में क्या हुआ ?
सुरेश :- गांधीजी का जन्म!
टीचर :- बिलकुल सही.. बैठो निचे
टीचर :- पप्पू तु बोल.. 1872 में क्या हुआ?
पप्पू :- गांधीजी ३ साल के हो गए.. मैं भी बैठू क्या?


अध्यापक :- अकबर कौन था?
पप्पू :- अकबर Gay tha
अध्यापक :- क्या? तुम पागल हो गए हो?
बताओ ऐसा क्यों लगता है तुम्हे?
पप्पू :- हम सबने सुना है
लैला-मजनू,
हीर -राँझा,
सोनी-महिवाल,
रोमियो-जूलिएट
बस केवल
.
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अकबर-बीरबल!
अध्यापक बेहोश!


अध्यापक पप्पू से: बताओ अगर मैं तुम्हे एक
तीसरी आँख लगाने की शक्ति दूँ तो तुम वो आँख कहाँ लगाओगे?
पप्पू: जी, अपने हाथ की बड़ी ऊँगली पर।
अध्यापक: बड़ी ऊँगली पर क्यों?
पप्पू: ताकि वो ऊँगली आपकी गां* में डाल कर देख सकूँ कि ऐसा कौन सा कीड़ा है आपकी गां* में जो आप सारे सवाल मुझ से ही पूछते हैं।


टीचर :- कौनसा पंछी सबसे तेज़ उड़ता है?
स्टूडेट :- सर, हाथी।
टीचर :- नालायक, तेरा बाप क्या करता है?
स्टूडेट :- दाउद के गैंग में शूटर है।
टीचर :- शाबाश। लिखो बच्चो हाथी।


संस्कृत की क्लास मे गुरूजी ने पूछा :-
पप्पू इस श्लोक का अर्थ बताओ..
“कर्मण्येवाधिकारस्ते मा फलेषु कदाचन”.
पप्पू :- राधिका शायद रस्ते मे फल बेचने का काम कर रही है!
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गुरूजी :- मूर्ख, ये अर्थ नही होता है.. चल इसका अर्थ बता :-
“बहुनि मे व्यतीतानि, जन्मानि तव चार्जुन.”
पप्पू :- मेरी बहू के कई बच्चे पैदा हो चुके हैं, सभी का जन्म चार जून को हुआ है.
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गुरूजी गुस्सा हो गये फिर पुछा :-
“तमसो मा ज्योतिर्गमय”
पप्पु :- तुम सो जाओ माँ मैं ज्योति से मिलने जाता हुँ.
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गुरूजी = अरे गधे, संस्कृत पढता है कि घास चरता है.. अब इसका अर्थ बता:-
“दक्षिणे लक्ष्मणोयस्य वामे तू जनकात्मजा.”
पप्पू :- दक्षिण मे खडे होकर लक्ष्मण बोला जनक आजकल तो तू बहुत मजे मे है!
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गुरूजी :- अरे पागल, तुझे १ भी श्लोक का अर्थ नही मालूम है क्या ?
पप्पू :- मालूम है ना.
गूरूजी :- तो आखरी बार पूछता हूँ इस श्लोक का सही सही अर्थ बताना.-
“हे पार्थ त्वया चापि मम चापि!”
क्या अर्थ है जल्दी से बता…
पप्पू :- महाभारत के युद्ध मे श्रीकृष्ण भगवान अर्जुन से कह रहे हैं कि..
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गुरूजी उत्साहित होकर बीच मे ही कहते हैं :-
हाँ, शाबास, बता क्या कहा श्रीकृष्ण ने अर्जुन से?
पप्पू भगवान बोले :- अर्जुन तू भी चाय पी ले, मैं भी चाय पी लेता हूँ.. फिर युद्ध करेंगे!
गुरूजी बेहोश